आज ऐसे कीजिएगा कान्हा की पूजा ? घर में विराजेंगे बाल-गोपाल

हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की. जी हां, कान्हा को अपने घर में भक्तिभाव से लाना है, तो आपके लिए इन बातों को जानना जरूरी है. क्योंकि कान्हा भक्तवत्सल हैं और भक्तों के भाव पर भावविभोर हो जाते हैं. इसलिए आपको पता होना चाहिए कि आज के दिन उन्हें अपने घर में बुलाने का सबसे खास दिन है. इस खास दिन को आप खास तरीके से कान्हा को अपने घर में बुला सकते हैं. वो भी अराधना और पूजा के साथ भक्ति भाव को अपनाकर. इसके लिए आपको कान्हा की भक्ति कुछ इस तरीके से करनी होगी. पूजा में कुछ ऐसा खास ख्याल रखना होगा. जिससे कान्हा प्रसन्न होकर आपके घर में विराजेंगे. तो चलिए जानते हैं, आज कान्हा को अपने घर कैसे लाया जाए.

एक साफ़ चौकी, पीले या लाल रंग का साफ़ कपड़ा, खीरा, शहद, दूध, दही, पंचामृत, बाल कृष्ण की मूर्ति, चंदन, अक्षत, गंगाजल, धूप, दीपक, अगरबत्ती, मक्खन, मिश्री, तुलसी के पत्ते और भोग सामग्री. वृंदावन के राधा मंदिर और कान्हा मंदिर से जुड़े भक्तों का कहना है कि . मान्यता है भाद्रपद कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को अर्धरात्रि में रोहिणी नक्षत्र में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था. जन्माष्टमी पूजा रात 12 बजे के करीब की जाती है. इस दिन लोग व्रत रखते हैं और श्री कृष्ण की प्रतिमा का खूबसूरत श्रृंगार करते हैं. जन्माष्टमी पूजा का मुहूर्त रात 12 बजे से 12.44 बजे तक रहेगा. अष्टमी तिथि की समाप्ति 31 अगस्त को दोपहर 1.59 बजे होगी. चंद्रोदय रात 11.35 पर होगा। रोहिणी नक्षत्र की समाप्ति 31 अगस्त को सुबह 09.44 बजे होगी.

कृष्ण जी को पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएं और उन्हें नए वस्त्र पहनाकर उनका सुंदर श्रृंगार करें. बाल गोपाल को धूप, दीप दिखाएं. उन्हें रोली और अक्षत का तिलक लगाएं और माखन-मिश्री का भोग लगाएं. कृष्ण जी पूजा में गंगाजल और तुलसी के पत्ते अवश्य उपयोग करें. साथ ही लकड़ी की बांसुरी भी रखें. विधिपूर्वक पूजा करने के बाद कृष्ण जन्माष्टमी की कथा जरूर सुनें. मोरपंख का विशेष ध्यान रखें. अंत में भगवान कृष्ण की आरती कर प्रसाद सभी को वितरीत कर दें.

 

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