मुजफ्फरपुर। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र (एनआरसीएल), मुजफ्फरपुर और भाभा परमाणु शोध केंद्र (बीएआरसी) मुंबई के वैज्ञानिकों ने मिलकर लीची को प्रसंस्कृत कर कम तापमान पर 30 से 45 दिनों तक संरक्षित करने में सफलता पाई थी।

इसके लिए एनआरसीएल मुशहरी में करीब दो करोड़ रुपये खर्च कर एक प्रसंस्करण यूनिट की स्थापना भी की गई थी। वर्ष 2017 में इसका उद्घाटन हुआ था, लेकिन 2021 से यह यूनिट बंद है।
कारण बीएआरसी द्वारा यूनिट के एकमात्र एक्सपर्ट विज्ञानी को वापस बुलाना है। इससे साफ है कि इस साल भी किसानों को इस यूनिट का लाभ नहीं मिल पाएगा। करोड़ों की लागत से तैयार यूनिट शोपीस बन गई है।

निदेशक डा. शेषधर पांडेय के अनुसार लीची प्रसंस्करण इकाई लीची किसानों को अधिक मूल्य लाभ देने के उद्देश्य से लगाया गया है। सीजन आफ होने के बाद भी डेढ़ माह तक प्रसंस्करण कर लीची को यहां रखा जा सकता था,
मगर इकाई चलाने के लिए अनुसंधान केंद्र के पास एक्सपर्ट विज्ञानी नहीं हैं। बीएआरसी के विज्ञानियों संग पत्राचार किया जा रहा है। इस बार एक्सपर्ट के आने की संभावना है।



