25 जनवरी को दोपहर बाद लग रहा पंचमी का योग, जानें सरस्वती पूजन एवं शुभ मुहूर्त

भगवान श्रीगणेश, श्रीविष्णु एवं मां भगवती सरस्वती की पूजा-अर्चना से ज्ञान प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। 26 जनवरी को उदया तिथि में पंचमी तिथि मिलने से वसंत पंचमी पर्व उसी दिन मनाया जाएगा। उस दिन गुरुवार होने से सरस्वती पूजन की महत्ता बढ़ गई है। गुरुवार को विद्या का दिन माना गया है। माघ शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि 25 जनवरी को दिन में 12:35 बजे लगेगी। 26 जनवरी को पूर्वाह्न 10:29 बजे तक रहेगी।

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मुहूर्त खोजने की जरूरत नहीं – ज्योतिषाचार्य पं. विमल जैन बताते हैं कि सनातनी मान्यताओं के अनुसार यह ऐसा दिन है जब किसी शुभ कार्य के लिए मुहूर्त खोजने की जरूरत नहीं है। बच्चे के नामकरण से शादी-विवाह, गृह प्रवेश, नव व्यापार आरंभ आदि कार्य किए जा सकते हैं। 26 जनवरी को बहुत ही अच्छा विवाह मुहूर्त भी है। ऐसे में गणतंत्र और पंचमी के उत्सव के साथ मांगलिक कार्यक्रमों में भी लोगों की व्यस्तता होगी।

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पंचमी पर बनेंगे पांच योग- भृगु संहिता विशेषज्ञ पं. वेदमूर्ति शास्त्री बताते हैं कि गुरु बृहस्पति के मित्र चंद्रमा के साथ मीन राशि में विराजमान होने से गजकेसरी योग बनेगा। इसके अलावा शिव योग, सिद्ध योग, रवि योग और सर्वार्थसिद्धि योग भी बनेंगे। गजकेसरी योग 26 जनवरी को सूर्यास्त तक रहेगा। शिव योग दोपहर 03:28 बजे समाप्त होगा। सिद्ध योग अपराह्न 03:28 बजे से 27 जनवरी को दोपहर 03:28 बजे तक रहेगा। रवि योग तथा सर्वार्थसिद्धि योग 26 जनवरी को सायं 06:57 से 27 जनवरी की सुबह 07:12 तक रहेगा।


सरस्वती पूजा मुहूर्त 2023-

अभिजित मुहूर्त दिन में 12:12 से 12:55 तक

विजय मुहूर्त दिन में 02:21 से 03:04 तक

अमृत काल दिन में 02:22 से 03:54 तक

गोधूलि मुहूर्त शाम 05:52 से 06:19 तक

ऐसे हुआ भगवती का प्राकट्य

ऐसी कथा है कि मानव रचना के समय पृथ्वीलोक मौन था। इस पर त्रिदेव हैरान थे। तब ब्रह्मा ने शिव और विष्णु से आज्ञा लेकर अपने कमंडल का जल पृथ्वी पर छिड़का। तब कंपन शुरू हुआ। उस स्थान से शक्तिरूपी माता प्रकट हुई। एक हाथ में वीणा, दूसरा तथास्तु मुद्रा में था। उनके अन्य दोनों हाथों में पुस्तक और माला थी। त्रिदेवों ने उनसे वीणा बजाने की प्रार्थना की। तीनों लोकों में वीणा का मधुरनाद होने लगा। पृथ्वी लोक के जीव-जंतु और जन भाव विभोर हो गए। लोकों में चंचलता आई। त्रिदेव ने मां को शारदे सरस्वती, संगीत की देवी का नाम दिया।होलिका की स्थापना होगी।

वसंत पंचमी के दिन होलिका की स्थापना कर उनके गीतों का गायन किया जाता है। वसंत पंचमी का पर्व मौसम परिवर्तन के साथ खुशहाली का संदेश भी देता है। इसी दिन से ‘वसंत ऋतु की शुरुआत हो जाती है। ‘रति-काम महोत्सव’ मनाने की परंपरा भी भारत के कई राज्यों में निभाई जाती है।

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