बिहार : राष्ट्रपति से सम्मानित इस बुजुर्ग टीचर की अनोखी मुहिम, महादलित बस्ती की बच्चियों को कर रहीं जागरूक

पूर्णिया: समाज के लिए कुछ करने की ललक हो तो उम्र बाधक नहीं होती है. पूर्णिया में 67 साल की एक बुजुर्ग महिला अभी भी शिक्षा का अलख जगा रही हैं. दरअसल, शिक्षिका पद से सेवानिवृत्त होने के बाद वह बच्चों को उनके घर पर जाकर फ्री शिक्षा देती हैं. इनका नाम है अर्चना देव. इन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार मिल चुका है. इनका सपना है कि हर घर से कम से कम एक लकड़ी स्वावलंबी बने.

अर्चना करती रहेंगी भारत के भविष्य की रचना -पूर्णिया रानीपतरा की रहनेवाली अर्चना देव राष्ट्रपति पुरस्कार से पुरस्कृत शिक्षिका हैं. वे कहती है कि उम्र तो सच में ज्यादा हो गई हैं, लेकिन उन्हें बच्चों को पढ़ाने में बहुत मजा आता है. बच्चों को पढ़ाने से उन्हें नई ऊर्जा मिलती है. वह नई ऊर्जा लेने के लिए गांव-गांव जाकर बच्चों को पढ़ाती हैं. मुफ्त शिक्षा देकर नई ऊर्जा भी लेती हैं. उन्होंने कहा कि उनके इस प्रयास से महादलित बस्ती के बच्चों में बहुत फायदा दिख रहा है. उनकी इच्छा है कि हर लड़की अपने पैर पर खड़ी हो. वह किसी के पास हाथ न फैलाए. इस इच्छा को पूर्ण करने के लिए वे समाज में घूम-घूम कर बच्चों को बुला-बुला कर पढ़ाती हैं. वे चाहती हैं कि बच्चियों के पास शादी से पहले एक अच्छी नौकरी हो. इसके लिए वे प्रयासरत रहती हैं.

बच्चों में भी दिखती है रुचि

वे कहती हैं कि यहां के बच्चे पढ़ाई में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं. 135 बच्चे नामांकित हैं. जिनमें 77 बच्चे रोजाना मुफ्त शिक्षा लेते हैं. अर्चना देव कहती हैं कि वे पिछले सात-आठ वर्ष से गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा दे रही हैं. उनके पास नर्सरी से लेकर 8वीं तक के बच्चे पढ़ने आते हैं. सभी बच्चों को अर्चना देव अपने एक सहयोगी शिक्षिका के साथ पढ़ाती हैं. वहीं छोटे-छोटे बच्चों को खेलकूद और मनोरंजन के साथ पढ़ाती हैं. जिससे बच्चे भी पढ़ाई में काफी रुचि रखकर रोजाना पढ़ने आया करते हैं.

बांस बाड़ी में पढ़ाई

बच्चों को पढ़ाने के लिए बांस के बगीचे में छाया में बैठकर पढ़ाया जाता है. हालांकि उन्हें बच्चों को मुफ्त पढ़ाने के लिए कोई अच्छी जगह नहीं है, जिस कारण वह इधर उधर बगीचों में पढ़ाती हैं. मुफ्त शिक्षा ले रहे महादलित बस्ती के बच्चे ने भी मैडम के इस प्रयास की सराहना की. वहीं बच्चे और बच्चियों ने कहा कि पिछले कई वर्षों से वे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. उन्हें पढ़ाने के लिए शिक्षिका रोजाना उनके गांव आती हैं और निशुल्क शिक्षा देती हैं.

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