अप’राध अनु’संधान के एडीजी ने किया वि’धि विज्ञान प्रयोगशाला का निरीक्षण, कहा-ब’यान बदल सकता है, पर विज्ञान नहीं

MUZAFFARPUR (ARUN KUMAR) : मंगलवार को अपराध अनुसंधान के अपर पुलिस महानिदेशक विनय कुमार मुज़फ़्फ़रपुर के काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र के गन्नीपुर स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) का निरी’क्षण करने पहुंचे। निरी’क्षणोपरांत उन्होंने एफएसएल की का’र्यशैली पर संजायेताते हुए कहा कि पुलिस अधिकारियों को अप’राध और अप’राधियों के बयान सहित अन्य साक्ष्यों को बेहतर ढंग से संकलन करने के साथ ही तकनीकी रूप से वैज्ञानिक पद्धति से बेहतर ढंग से जाँ’च व निरी’क्षण करने का निर्देश दिया गया है.

उनके साथ तिरहुत रेंज के आईजी गणेश कुमार, सिटी एसपी नीरज कुमार सिंह भी मौजूद रहे। वहीं अधिकारी को अप’राधी को लेकर जुटाये गये साक्ष्यों का संकलन करने, जांच हेतु विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजने और रि’पोर्ट बनाने में विलम्ब नहीं करने का निर्देश दिया. उन्होंने बताया की विधि विज्ञान प्रयोगशाला में परी’क्षण/जाँ’च सुविधाएं बढ़ाई गई हैं, तक’नीकी विशेषज्ञ से लेकर वैज्ञानिकों तक की नियुक्ति की गयी है, साथ ही सभी रिक्त पड़े पदों पर अधिकारीयों की प्रतिनियुक्ति की गई है.

भविष्य में आवश्यकतानुसार पद सृजित करते हुए और भी बहाली की जाएगी. एडीजी ने बताया की मुजफ्फरपुर स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला वर्ष 2015 में अस्तित्व में आया और विधिवत रूप से कार्य करना प्रारम्भ हुआ और लगातार इसकी कार्यप्रणाली में वृद्धि हुई है. पिछले वर्ष 2018 में विधि विज्ञान प्रयोगशाला द्वारा तिरहुत प्रक्षेत्र के सम्बद्ध जिलों के 1513 गंभीर कां’डों में वैज्ञानिक पद्धति से जां’च/परीक्षण कर पुलिस विभाग को सहयोग दिया है.

विधि विज्ञान प्रयोगशाला में लगातार आधुनिक से लेकर अत्या’धुनिक उपक’रण स्थापित किये गए हैं. प्रयो’गशाला में इस वर्ष भी नए उपकरण लगाए गए हैं. मुख्यालय का प्रयास है की विधि विज्ञान के क्षेत्र में अत्या’धुनिक उपक’रणों का क्रय कर विधि विज्ञान प्रयोगशाला को और सश’क्त बनाया जाये. बिहार पुलिस का मानना है की गवाहों का ब’यान बदल सकता है, गवाह मुकर सकते हैं. पर जां’च के दौरान विश्लेषकों द्वारा विश्लेषण के पश्चात् वैज्ञानिकों द्वारा तैयार वैज्ञानिक साक्ष्य/रिपोर्ट झूठे नहीं हो सकते हैं.
वैज्ञानिक पद्धति के आधार पर तैयार जां’च रिपोर्ट की विश्वसनीयता को न्यायालय द्वारा भी बयान से अधिक मान्यता दी जाती है. बयान बदल सकता है, पर विज्ञान नहीं बदल सकता. उसके आधार पर अप’राधियों पर दोष सिद्ध किया जा सकता है. उन्होंने कार्यक्षेत्र के पुलिस पदाधिकारियों को 15-20 की संख्या के बैच में विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजकर इसके बारे में अवगत कराते हुए साक्ष्य संकलन हेतु प्रशिक्षण दिलाने के निर्देश एसएसपी को दिए हैं.
एडीजी ने बताया की रेंज के आईजी गणेश कुमार को विधि विज्ञान प्रयोगशाला के स्थानीय नियंत्रण अधिकारी के तौर पर जिम्मेवारी दी गयी है. वर्तमान में विधि विज्ञान प्रयोगशाला सीआईडी के नियंत्र’णाधीन है, जिसका मुख्यालय पटना में है. वहीं विधि विज्ञान प्रयोगशाला का कार्य जिले के अनुस’न्धान से सम्बंधित है. मौलि’क रूप से विधि विज्ञान प्रयोगशाला से फ़ायदा जिले के अनुसंधा’नकर्ताओं को मिलता है, अतः रेंज के आईजी से अनुरोध किया गया है की समय-समय पर भ्रमण करेंगे और यहाँ की आव’श्यकताओं को सं’ज्ञान में रखते हुए उसका निरा’करण अपने स्तर से करेंगे.
मुख्यतः गं’भीर कां’डों में वैज्ञानिक मौके पर जाकर पड़’ताल करेंगे और कां’ड से सम्बंधित प्रदर्श, भौतिक साक्ष्य का संकलन कर वि’धिपूर्वक जां’च करेंगे. प्रायः देखा गया है की अनुसंधा’नकर्ता ज’प्त साक्ष्य को न्यायालय से आदेश प्राप्त होने के बावजूद जां’च हेतु प्रयोगशाला नहीं भेजते हैं, और मा’लखाना में रख कर छोड़ देते हैं, जिससे जां’च नहीं हो पाती और अनु’सन्धान पर इसका असर पड़ता है. जो सही नहीं है. ऐसे मामले अगर संज्ञान में आते हैं तो त्वरित का’र्रवाई करते हुए दोषी पुलिस पदाधिकारी को द’ण्डित किया जायेगा.
एडीजी ने स्पष्ट तौर पर कहा है की न्यायालय से आदेश प्राप्त होते ही सं’कलित/ज’प्त सा’क्ष्य को अविलम्ब प्रयोगशाला भेज दिया जाये. विधि विज्ञान प्रयोगशाला की जाँ’च रिपोर्ट पूर्ण होने के बावजूद कई अनुसं’धानकर्ताओं द्वारा भी ढि’लाई बरतते हुए रिपोर्ट संक’लन करने में भी विल’म्ब किया जाता है. इस मामले में रेंज के आईजी को निर्देश देते हुए कहा गया की एक सिस्टम के तहत सम्बंधित जिलों/क्षेत्र के वरीय पदाधिकारियों को निदेशित करेंगे की मामले के अनु’संधानकर्ता या विशेष बल भेजकर जां’च रिपोर्ट को संकलित कर अनु’सन्धान में उसका उपयोग करें.
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