पूर्णिया। रबी की बुआई से शुरू हुई यूरिया की किल्लत अभी तक बरकरार है। अभी भी किसान एक बोरा यूरिया के लिए दिनभर विभाग व दुकानों का चक्कर काट रहे हैं। जिले को आवंटन मिलते ही यूरिया दुकानों तक पहुंचती नहीं कि लूट मचनी शुरू हो जाती है।

कुछ को मिल पाता है तो कुछ हताश घर लौटने को विवश होते हैं। परेशान किसान जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों से गुहार लगाते भी थक गए हैं और इसका कोई निदान नहीं निकल पा रहा है। 55 हजार के एवज में अब तक मिला है 43 हजार मैट्रिक टन विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में रबी की बुआई के रकवा के अनुसार अब तक 55 हजार मैट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता थी।

इस एवज में जिले को अब तक 43 हजार मैट्रिक टन का ही आवंटन मिल पाया है। इस स्थिति के अनुसार भी यूरिया की किल्लत स्वभाविक है। बता दें कि जिले में विशेषकर मक्का की बृहत पैमाने पर खेती होती है। इसके अलावा गेहूं की भी खेती है।
इन फसलों में पटवन के बाद यूरिया की जरुरत होती है। स्थिति यह है कि किसान यूरिया नहीं मिलने के कारण पटवन में देरी करने को विवश हैं और इस चलते फसल पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। सड़क पर उतर विरोध जताते रहे हैं किसान यूरिया की किल्लत के बीच लगातार किसानों के सब्र का बांध छलकता रहा है।
लगातार किसान सड़कों पर उतरते रहे हैं। हर प्रखंड में किसानों का धरना-प्रदर्शन हो चुका है। यह आक्रोश बेजा भी नहीं है। किसानों के लिए मक्का ही सबसे अहम नकदी फसल है और इसी पर उनका पूरा परिवार टिका रहता है। हरदा के अजीत यादव ने कहा कि मक्का पर ही बिटिया की शादी से लेकर बच्चों की पढ़ाई तक निर्भर रहता है। ऐसे में अगर मक्का की फसल प्रभावित होगी तो किसान कहीं के नहीं रहेंगे। उन्होंने यूरिया की किल्लत की नाराजगी भी जताई।

